किसानों ने लिया संकल्प, न जहर बोएंगे और न ही जहर खाएंगे

हरियाणा के किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ ले जाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। महेंद्रगढ़ जिला के किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके तथा फायदे बताने के लिए मंगलवार को कृषि उपनिदेशक कार्यालय नारनौल के सभागार में एक दिवसीय आनलाइन प्रशिक्षण कैंप का आयोजन किया गया।

किसानों ने लिया संकल्प, न जहर बोएंगे और न ही जहर खाएंगे

नारनौल: हरियाणा के किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ ले जाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। महेंद्रगढ़ जिला के किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके तथा फायदे बताने के लिए मंगलवार को कृषि उपनिदेशक कार्यालय नारनौल के सभागार में एक दिवसीय आनलाइन प्रशिक्षण कैंप का आयोजन किया गया।

कैंप में मुख्य रूप से विभिन्न गांव के निवर्तमान सरपंच, नंबरदार तथा प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती के चार स्तंभ बीजामृत, जीवामृत, अच्छादन, वाफसा को बनाने और उनका खेती में प्रयोग करने की विधि के बारे में बारीकी से बताया। इसके अलावा पंचकूला तथा हमेटी (हरियाणा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) जींद से विज्ञानियों और कृषि अधिकारियों ने प्राकृतिक खेती करने के टिप्स दिए।

कैंप के बारे में उपकृषि निदेशक डा. बलवंत सहारण ने बताया कि कैंप का मुख्य उद्देश्य देश के प्रधानमंत्री द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सोच को आगे बढ़ाना है। रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोगों से हमारे खेतों में पैदा हो रहे जहरीले खाद्यान्नों को ठीक करने के लिए यह एक बड़ा अभियान है। हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि न जहर बोएंगे और न ही जहर खाएंगे। इसका मुख्य आधार भारतीय कृषक एवं कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर द्वारा दिए गए प्राकृतिक खेती के सिद्धांत रहे। प्राकृतिक खेती के सिद्धांत जिसमें देसी गाय, जुताई, जल प्रबंधन, पौधों की दिशा, सहयोगी फसलें, आच्छादन, सूक्ष्म पर्यावरण, केशाकृषण शक्ति, देसी केंचुऐ की गतिविधि शामिल है।

इस दौरान किसानों को प्राकृतिक रुप से पौध संरक्षण के बारे में बताया गया जिसमें विभिन्न हानिकारक कीटों के लिए नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निस्त्र को बनाने की विधि बताई गई। इसके अतिरिक्त विषाणु से उत्पन्न होने वाले रोगों के नाश के लिए फफूंद नाशक प्राकृतिक रुप से बनाने व प्रयोग करने की विधि बताई गईं। अगर यह विधि अपनाई जाए तो जहरीले कीटनाशकों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत आत्मा योजना से स्थापित सामुदायिक रेडियो केंद्र रेडियो अरावली एफएम 90.4 मेगा हर्टज पर भी इसका सीधा प्रसारण किया गया, जिसे प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना को जन आंदोलन बनाया जा सके।

रेडियो अरावली के संचालक मास्टर संतलाल यादव ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण शिविर से किसानों को बहुत लाभ मिलता है। उनकी विभिन्न शंकाओं का समाधान भी मिल पाता है। कामन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी जिले के सैकड़ों किसानों ने इस प्रशिक्षण शिविर का लाभ उठाया। इस मौके पर विषय विशेषज्ञ डा. हरपाल सिंह, उपमंडल कृषि अधिकारी डा. मनमीत यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़ डा. अजय यादव, डा. अनिल बूरा, डा. सुमित यादव तथा अशोक नंबरदार, प्रेमदास महाराज, विजय, मोहन लाल नंबरदार, रामचंद्र आदि किसानों ने भाग लिया।

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