फतेहाबाद: लंपी स्किन बीमारी से एक गाय की मौत, विभाग ने मांगी 66,800 वैक्सीन

पशुपालन विभाग अब गायों का वैक्सीनेशन करवाएगा। जिले में संक्रमित पशुओं की संख्या हुई 86 हो गई है। अभी तक रतिया क्षेत्र में ही 52 केस आ चुके हैं। संक्रमित गायों को आइसोलेट कर इलाज किया जा रहा है।

फतेहाबाद: लंपी स्किन बीमारी से एक गाय की मौत, विभाग ने मांगी 66,800 वैक्सीन

हरियाणा के फतेहाबाद में लंपी स्किन बीमारी के कारण रतिया क्षेत्र की गोशाला में एक गाय की मौत हो गई है। वहीं, जिले में इस बीमारी के अब 86 केस हो गए हैं। अभी तक रतिया क्षेत्र में ही 52 केस आ चुके हैं। संक्रमित गायों को आइसोलेट कर इलाज किया जा रहा है। हालांकि, अभी 7 गायें ठीक हुई हैं।

बीमारी का संक्रमण फैलते देख पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने 66 हजार 800 गायों का वैक्सीनेशन करवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय को 66 हजार 800 वैक्सीन भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। इसके अलावा ड्रग विभाग को भी सूचना दी गई है।

उपनिदेशक ने बुलाई आपात बैठक

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखविंद्र सिंह ने जिले के सभी उपमंडल अधिकारियों व पशु चिकित्सकों की आपात बैठक बुलाकर इस बीमारी की रोकथाम के प्रयास और तेज करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में रतिया उपमंडल अधिकारी डॉ. रामफल कुंडू, फतेहाबाद से डॉ. चंद्रपाल गढ़वाल, टोहाना से डॉ. चरणजीत, रतिया के सर्जन डॉ. सुनील बिश्नोई आदि मौजूद रहे। उपनिदेशक ने लगातार चेकिंग अभियान चलाने और बीमार गायों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए।

गोशाला में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं, इसलिए दम तोड़ गई गाय

रतिया के वेटरनरी सर्जन डॉ. सुनील बिश्नोई का कहना है कि बीमार पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखना जरूरी है, जहां मक्खी-मच्छर न पनपें। रतिया क्षेत्र की जिस गोशाला में गाय की मौत हुई है, वहां जलभराव की समस्या है। इस कारण गाय रिकवरी नहीं कर पाई और दम तोड़ गई। डॉ. सुनील ने बताया कि गायों को गोट पॉक्स नामक वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय को डिमांड भेज दी गई है।

53 पशु चिकित्सालयों व 91 पशु औषधालयों की टीमें हुई सतर्क

लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग की टीमें 53 पशु चिकित्सालयों व 91 पशु औषधालयों में संभावित लक्षण वाले पशुओं का इलाज कर रही हैं।

लंपी स्किन बीमारी के लक्षण

पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाती है।

बीमारी के फैलाव के कारण

मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है। संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी यह बीमारी फैलती है।

बचाव के तरीके

डॉ. सुनील बिश्नोई के अनुसार गोशालाएं व पशुपालक संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखें। बीमार पशु का तुरंत चिकित्सक से इलाज शुरू करवाएं। पशुओं के बाड़े को साफ सुथरा रखें। स्वस्थ पशुओं को फिटकरी या लाल दवा से दिन में दो बार नहलाएं। बीमार पशुओं को बाहर चराने न लेकर जाएं। एक स्थान से दूसरे स्थान पर पशुओं को न लेकर जाएं। डिजिटल थर्मामीटर से दिन में तीन बार तापमान जांचे। बुखार हो तो दो गोली अवश्य दें। एंटी एलर्जिक पांच दिन तक दिन में एक बार जरूर दें।

लंपी स्किन बीमारी के रोकथाम के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग पूरी तरह से सतर्क है। इस बीमारी में मृत्यु दर केवल 1-2 प्रतिशत है। इसलिए पशुपालक व गोशाला प्रबंधक घबराने के बजाय सतर्कता बरतें। लक्षण वाले पशु का इलाज नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय के चिकित्सक से करवाएं। -डॉ. सुखविंद्र सिंह, उपनिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, फतेहाबाद।

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