हरियाणा प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार करेगा

हरियाणा प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार करेगा

चंडीगढ़। हरियाणा में प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार किया जाएगा। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन जाएगा। प्राकृतिक खेती पर अभी तक वैज्ञानिक शोध पत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं शोध निदेशक वार्ता कर जल्द ही इस कार्य को अमलीजामा पहनाएंगे। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने गुरुवार को यह जानकारी दी

उन्होंने यहां प्राकृतिक खेती की समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिये. इससे प्राकृतिक खेती की पूरी प्रक्रिया, समय अवधि और परिणामों की विस्तृत जानकारी मिलेगी। वर्तमान में 2 प्रशिक्षण केन्द्र गुरुकुल कुरुक्षेत्र व घरौंदा, करनाल में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, जींद के हमेटी और सिरसा के मंगियाना में तीन और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। किसानों को जागरूक करने के लिए हर प्रखंड में प्रदर्शनी मैदान में प्राकृतिक खेती की जाएगी. अब तक 5 जिलों में इस तरह के प्रदर्शन फार्म तैयार किए जा चुके हैं

अब तक 2992 किसानों ने पंजीयन कराया
मुख्य सचिव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए 2992 किसानों ने सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराया है. रबी सीजन में 1201 किसानों ने प्राकृतिक खेती करने की सहमति दी है। 3600 मिट्टी के नमूने भी एकत्र किए गए हैं। अब तक 405 एटीएम, बीटीएम और 119 प्रगतिशील किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 151 युवाओं ने खेती की इस पद्धति का प्रशिक्षण भी लिया है।
हरियाणा की नई पहल
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देशी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी और जीवामृत घोल के 4 बड़े ड्रम तैयार करने पर प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये दिए जा रहे हैं. ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। उत्पादों को सीधे किसानों के खेतों से ही पैक किया जाए, इसके लिए एक योजना भी तैयार की गई है

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